धर्म, अध्यात्म और विज्ञान की अद्भुत पहेली
– संजय शेफर्ड

हिमालय की गोद में बसा कसार देवी मंदिर वैसे तो बहुत ही शांत और सुरम्य है पर यहां विज्ञान के कई अद्भुत रहस्य भी छुपे हुए हैं जिसकी वजह से दुनिया भर के लोग इस जगह को धर्म, अध्यात्म और विज्ञान की पहेली के रूप में देखते हैं. इसी बात ने मेरा भी ध्यान खींचा और मैंने दिल्ली के आनंदविहार बस अड्डे से बस पकड़ी और अल्मोड़ा पहुंच गया. अल्मोड़ा शहर से आठ किमी दूर कश्यप पर्वत पर स्थित यह जगह उन्नीसवीं शताब्दी के सातवें और आठवें दशक के दौरान हिप्पी आंदोलन का केन्द्र रही है इसलिए इस जगह को हिप्पी हिल के नाम से भी जाना जाता है.
इस जगह का शांत वातावरण लोगों को अपनी तरफ खींचता है और देश दुनिया से तमाम लोग मीलों की यात्रा करके इस जगह पर पहुंचते हैं. मैं भी इस जगह पर कुछ दिन पहले गया और सुनी- सुनाई बातों से इतर तकरीबन चार घंटे यहां बैठा. मैंने महसूस किया कि इस मंदिर के बारे में जो कुछ कहा जाता है उसका संबंध एक अलग तरह की ऊर्जा से है जो आपको बेहद शांत कर देती है. आप इस जगह पर पहुंचकर अनायास ही अच्छा- अच्छा महसूस करने लगते हैं और आपका मन सकून से भर जाता है. सब कुछ इतना अच्छा लगता है कि उठने का दिल नहीं करता और आप देर तक बैठे रह जाते हैं और उस ऊर्जा को पकड़ने की कोशिश करते हैं.

सामने मंदिर होता है और आप आस्था से भर जाते हैं. एक सज्जन बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण दूसरी शताब्दी में हुआ था, देवी की महिमा अपरंपार है, माता जी हर मनोकामना पूरी करती हैं. आगे वह यह भी बताते हैं कि कसार देवी मंदिर में दुर्गा के आठवें स्वरूप यानि ‘देवी कात्यायनी’ की पूजा होती है. दुर्गा मां ने यहां शुंभ- निशुंभ नामक दो राक्षसों को मारने के लिए कात्यायनी देवी का रूप लिया था.
इस मंदिर में पहुंचकर एक अलग तरह का अहसास होता है. फिर यह अहसास धीरे- धीरे गहरा होता जाता है. अनायास ही महसूस होता है कि यह जगह हमारी अब तक की घूमी हुई अन्य जगहों से अलग है. यह मंदिर भी अब तक के घूमे मंदिरों से अलग है. तभी नज़र बोर्ड पर पड़ती है जिसे पढ़कर पता चलता है कि हम जो कुछ महसूस कर रहे हैं वैसा ही इस जगह पर कभी स्वामी विवेकानंद ने भी किया था और इस जगह को उन्होंने भी अद्भुत बताया था.

इस स्थान के चमत्कारों से प्रभावित होकर स्वामी विवेकानंद 1890 में कसार देवी मंदिर कुछ महीनों के लिए आए थे. कहा जाता है कि उन्हें अल्मोड़ा से करीब 22 किमी दूर ककड़ीघाट में खास ज्ञान की अनुभूति हुई थी. स्वामी विवेकानंद जी का इस स्थान के बारे में कहना है कि अगर धार्मिक भारत के इतिहास से हिमालय को निकाल दिया जाए तो उसका अत्यल्प ही बचा रहेगा यह केंद्र केवल कर्म प्रधान न होगा बल्कि निस्तब्धता ध्यान और शांति की प्रधानता भी होगा.
ठीक इसी प्रकार बौद्ध गुरु लामा अंगरिका गोविंदा ने गुफा में रहकर खास साधना की थी. अमेरिका के बॉब डायलन की भी कसार देवी मंदिर पसंदीदा जगह रही है.

इस जगह के भूगर्भ में शक्तिशाली चुंबकीय प्रभाव है. भू वैज्ञानिक कई वर्षों से इसका अध्ययन कर रहे हैं. दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा इस जगह पर शोध कर रही है. नासा के मुताबिक विश्व में सिर्फ तीन ही ऐसी जगहें हैं जहां पर इस तरह की खास चुंबकीय शक्ति महसूस की जा सकती है. पेरू का माचू पिचू और इंग्लैंड का स्टोनहैंज और भारत का कसार देवी.
विज्ञान की भाषा में इस बात को समझने का प्रयास करें तो पता चलता है कि अंतरिक्ष में एक इलाका ऐसा भी है जहां हानिकारक विकिरण होते हैं, लेकिन पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड के कारण बने इस इलाके से ये खतरनाक विकिरण धरती पर नहीं पहुंच पाते हैं. यह फील्ड सूर्य और सुदूर ब्रह्माण्ड के आने वाले कणों के विकिरण को रोकती है. इस खास इलाके को मैग्नेटोस्फियर कहा जाता है. मैग्नेटोस्फियर में इलेक्ट्रॉन त्वरण से बहुत ही ज्यादा ऊर्जा हासिल कर लेते हैं जिसके कारणों का पता अब वैज्ञानिकों पता चला है.
कसार देवी मंदिर परिसर के आस-पास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है. वैन एलेन बेल्ट मैग्नेटोस्फियर का होना ही इस तरह के अध्ययन का आधार है. दुनिया भर के तमाम वैज्ञानिक इस दिशा में अभी भी शोध में लगे हुए हैं. इस दिशा में खोज से स्पेस ट्रेवल में काफी सहूलियत मिलेगी.
शोध और अध्ययन कभी ख़त्म नहीं होंगे लेकिन दुनिया की इस अनोखी जगह को एक बार आपको जरूर देखना चाहिए.