गढ़पहरा

– कुमार रूपेश

सागर (म. प्र.) की पुरातात्विक विरासत में गढ़पहरा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. झांसी, ललितपुर के रास्ते से सागर में प्रवेश करने पर पहली मुलाकात गढ़पहरा से ही होती है. ऊंची पहाड़ी पर नगर के प्रवेश द्वार पर बना होने से इसकी स्थिति नगर पहरेदार जैसी ही है.

इसकी प्राचीनता गोंड़ राजा संग्रामशाह के समय की मानी जाती है. उस समय गढ़पहरा गोंडवाने का ही एक गढ़ था जिसमें 360 मौजे थे. बाद में कहा जाता है कि इस भाग को डांगी राजपूतों ने जीत कर अपने राज्य में मिला लिया था. इसे पुराना सागर भी कहा जाता है. यह डांगी राज्य की राजधानी रही है. इन डांगी राजाओं को नरवर के कछवाहा राजपूतों का वंशज माना जाता है. गढ़पहरा शासकों में पृथ्वीपत, महाराज कुमार और मानसिंह के नाम ही ज्ञात हो सके हैं.

 पृथ्वीपत सन 1689 ई में मुगल शासन के जागीरदार के रूप में गढ़पहरा का शासक रहा. उसे लोकपरंपरा में कमजोर बुद्धि के लंपट व्यक्ति के रूप में आज भी याद किया जाता है. कहा जाता है कि गढ़पहरा के अपने महल की छत से चंद्रमा पर तीर चलाकर वह अपना स्वयं मनोरंजन किया करता था. ये भी कहा जाता है कि वह प्रत्येक वधू को उसकी प्रथम रात अपने साथ विताने के लिए बाध्य करता था.

राजा पृथ्वीपत को छत्रसाल के पुत्र ने अधिकारच्युत कर सागर स्थित परकोटा में रहने की अनुमति दी थी जहां कुछ वर्षों तक वह रहा. सन 1727 ई में अम्बर के राजा सवाई जयसिंह ने उसे उसकी खोई हुई पैतृक जागीर दिलाने में मदद की.

 डांगी सरदार सन 1732 ई तक परकोटा में रहा. इसी बीच उसके धोखेबाज़ अधिकारियों ने उसकी जागीर कुरवाई के नवाब दलपत खान को दे दी. बाद में इसे मराठों ने अपने अधिपत्य में लिया.

गढ़पहरा में अब भी कुछ ऐतिहासिक अवशेष हैं. कम ऊंचाई पर निर्मित इस किले पर एक सड़क के माध्यम से पहुंचा जा सकता है. इसका प्रवेश द्वार परिष्कृत है और चबूतरे पर एक मंदिर है.

यहां डांगी राजाओं के शीशमहल नाम से ग्रीष्म आवास के अवशेष भी मौजूद हैं. गढ़पहरा में यह कथा भी प्रचिलित है कि एक नटनी ने राजा को इतना प्रसन्न किया और वचन ले लिया कि आसपास की दो पहाड़ियों के बीच की खाई में रस्सी पर वह आरपार चल सके तो उसे आधा राज्य दे दिया जाएगा. नटनी पहाड़ी के दूसरे छोर पर पहुंचती उससे पहिले ही रानी ने ईर्ष्या के कारण रस्सी कटवा दी परिणामस्वरूप नटिनी पहाड़ियों के बीच गिर कर मर गई. यहां पहाड़ी पर एक छोटा ताल भी है जिसे मोती ताल कहा जाता है.


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