– त्रिलोक सिंह ठकुरेला
छुईमुई, ओ छुईमुई.
अरे, कहो क्या बात हुई.
छूते ही शरमाती हो.
बरबस सिकुड़ी जाती हो.
कितनी भोली भाली हो.
तुम तो बड़ी निराली हो.
क्यों आती है लाज कहो.
कुछ तो अपने राज कहो.
माना, छूते ही डरती.
कई रोग अच्छे करती.
शर्मीली तुम प्यारी हो.
सबकी बहुत दुलारी हो.
हमसे कभी न डरना तुम.
सबमें खुशियां भरना तुम.