– कमल जीत चौधरी
तुम हो तो
कागज़ के शहर में भी
फूलोत्सव है,
तुम न हो तो
फूलोत्सव भी
छलोत्सव है.
तुम हो तो
कांटे की नोक पर भी
प्रेम कविता,
तुम न हो तो
फूल की लोच पर भी
कंठ गाए पीड़ा
तुम हो तो बीज से फल,
तुम न हो तो स्वेटर से ऊन.
तुम हो तो कुछ है
तुम न हो तो कुछ है
तुम हो, तुम न हो
तुम हो.