Pehachaan पहचान

Author: Pehachaan

  • चांद में दिखती रोना

    चांद में दिखती रोना

    (माओरी लोक कथा का प्रीता व्यास द्वारा अनुवाद) : बहुत पुरानी बात है. दादी की दादी की दादी से भी बहुत- बहुत पहले की.

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    (अजय अज्ञात): कल भी ये अधूरी थी, आज भी अधूरी है. इश्क़ के बिना यारो, ज़िन्दगी अधूरी है. जगमगा रहा है घर, जगमगाते बलबों से ज़ेहन में…

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    (प्रवीन राय): थक चुके हैं यहां पे चल-चल के.अब तो मेहमां हैं एक दो पल के.

  • लोक पर्व खतडवा

    लोक पर्व खतडवा

    (डॉ. भूपेंद्र बिष्ट): धूप को पेड़ों से जाते हुए देखने के दिन आने को हैं. पहाड़ों पर महीने की शुरुआत संक्रांति (सूर्य के राशि परिवर्तन) की तिथि…

  • पूर्ण सत्य

    पूर्ण सत्य

    (पूर्ण सत्य के बारे में एक कहानी है ये. अमृता प्रीतम के उपन्यास “यह सच है ” में उन्होंने ये कहानी लिखी है. एक चेक कहानी बताते हुए. उषा वर्मा द्वारा उद्धृत.)

  • जलांध

    जलांध

    (प्रस्तुति: गीता गैरोला): चौमासा हमेशा त्योहारों की आमद के साथ बीतता है. श्राद्ध के पंद्रह दिनों में पितृ पूरे साल का भोजन जीम ने के साथ साल भर का राशन बांध कर विदा हो गए थे. आस पास के गांवों के बृत्ति ब्राह्मणों के साथ घर के बड़े- बूढ़े, कच्चे-बच्चे सब श्राद्धों का खाना खा के तृप्त थे.

  • जागो फिर एक बार महाप्राण

    जागो फिर एक बार महाप्राण

    (प्रकाश उदय): निराला की असली पहचान उनकी अक्खड़ता और फक्कड़ता में है. बसंत पंचमी के दिन जन्मे इस महाकवि ने जीवन को भी उत्सव ही जाना.

  • वसंत पंचमी: प्रकृति के परिवर्तन की आहट

    वसंत पंचमी: प्रकृति के परिवर्तन की आहट

    (प्रवीणा त्रिपाठी): जब शीतलता घटने लगती है और ताप प्रबल हो जाता है, जब आम्र मंजरियां गुच्छों में अमराई सजाने लगती हैं, जब पुष्प-पुष्प से श्याम भ्रमर…

  • इस बार गणतंत्र दिवस पर

    इस बार गणतंत्र दिवस पर

    (लतीफ़ घोंघी): ‘आप चुप हैं. गणतंत्र दिवस पर आप चुप रहें तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा.’ ‘क्या बोलें? समझ लो कि अपनी बोलती बंद है. स्कूल में देशभक्त…

  • वृद्ध कौन?

    वृद्ध कौन?

    (गीत चतुर्वेदी): तीन तरह की वृद्धताएं होती हैं: पहला, आयुवृद्ध. जो व्यक्ति उम्र से बूढ़ा हो गया हो. ऐसे लोग बहुतायत में होते हैं क्योंकि सबकी आयु…

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