Pehachaan पहचान

Category: Folk Story

  • जलांध

    जलांध

    (प्रस्तुति: गीता गैरोला): चौमासा हमेशा त्योहारों की आमद के साथ बीतता है. श्राद्ध के पंद्रह दिनों में पितृ पूरे साल का भोजन जीम ने के साथ साल भर का राशन बांध कर विदा हो गए थे. आस पास के गांवों के बृत्ति ब्राह्मणों के साथ घर के बड़े- बूढ़े, कच्चे-बच्चे सब श्राद्धों का खाना खा के तृप्त थे.

  • रो पाने का सुख (कर्नाटक की लोक कथा)

    रो पाने का सुख (कर्नाटक की लोक कथा)

    (अनुवाद: प्रीता व्यास): एक ज़माने में एक महिला थी जिसे एक दिन लगा कि दिल पर बड़ा बोझ है चुपचाप रो लेना चाहिए.

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