( डॉ. निधि सिंह): प्रिय, मत भेजो मुझे संदेसे, जग को यह स्वीकार नहीं है.
(डॉ. निधि सिंह): नव युग मंगल किरणों का सर्वत्र व्याप्त उजियारा.
(विनीता गुप्ता): हे! तरुवर, हे! महा विटप तुम स्वीकारो मेरा वंदन.
(विनीता गुप्ता): भारत की माटी का हर कण राम नाम अब बोल रहा.
(आशीष शर्मा (इंडोनेशिया)): बातों में, नारों में, तक़रीरों में, हिंदुस्तान की बात करते हैं सब
(आशीष शर्मा (इंडोनेशिया)): आज़ादी तेरी आन का सदक़ा, मातृभूमि के मान का सदक़ा