Pehachaan पहचान

Category: Poetry

  • जग को यह स्वीकार नहीं है

    जग को यह स्वीकार नहीं है

    ( डॉ. निधि सिंह): प्रिय, मत भेजो मुझे संदेसे, जग को यह स्वीकार नहीं है.

  • ज्योतिर्मय हो जग सारा

    ज्योतिर्मय हो जग सारा

    (डॉ. निधि सिंह): नव युग मंगल किरणों का सर्वत्र व्याप्त उजियारा.

  • पर्यावरण गीत

    पर्यावरण गीत

    (विनीता गुप्ता): हे! तरुवर, हे! महा विटप तुम स्वीकारो मेरा वंदन.

  • जय श्री राम

    जय श्री राम

    (विनीता गुप्ता): भारत की माटी का हर कण राम नाम अब बोल रहा.

  • आज़माइश अभी बाक़ी है

    आज़माइश अभी बाक़ी है

    (आशीष शर्मा (इंडोनेशिया)): बातों में, नारों में, तक़रीरों में, हिंदुस्तान की बात करते हैं सब

  • आज़ादी और नव-चेतना

    आज़ादी और नव-चेतना

    (आशीष शर्मा (इंडोनेशिया)): आज़ादी तेरी आन का सदक़ा, मातृभूमि के मान का सदक़ा

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