Pehachaan पहचान

Author: Pehachaan

  • चार ग़ज़लें

    चार ग़ज़लें

    (अना क़ासमी): आज पहली बार बेटी ने पकाई रोटियां. टेढ़ी-मेढ़ी मोटी पतलीं कच्ची पक्की रोटियां.

  • चार ग़ज़लें

    चार ग़ज़लें

    (अतुल अजनबी): हवा सी, आग सी, पानी सी, धूप सी गुज़री. हर इम्तिहां से यहां अपनी ज़िन्दगी गुज़री.

  • चार ग़ज़लें

    चार ग़ज़लें

    (सोम नाथ गुप्ता “दीवाना रायकोटी”): हक़ीक़त से भला कौन मुंह मोड़ के जिया है.

  • देवी पूजा का इतिहास

    देवी पूजा का इतिहास

    (रजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी): आचार्य कुबेरनाथ राय ने देवी-पूजा को केन्द्र में रख कर तीन महत्त्वपूर्ण शोध निबन्ध लिखे थे जो श्री गुलजारीलालनन्दा के मानवधर्ममिशन के पत्र नवजीवनपथ…

  • रामदरश मिश्र: एक युग

    रामदरश मिश्र: एक युग

    (डॉ. अनिता कपूर (कैलिफोर्निया, अमेरिका)): साहित्य की कोई उम्र नहीं पर जो साहित्य एक युगपुरुष साहित्यकार के साथ चला हो, उनकी लेखनी से निकला हो, वो एक…

  • जग को यह स्वीकार नहीं है

    जग को यह स्वीकार नहीं है

    ( डॉ. निधि सिंह): प्रिय, मत भेजो मुझे संदेसे, जग को यह स्वीकार नहीं है.

  • ज्योतिर्मय हो जग सारा

    ज्योतिर्मय हो जग सारा

    (डॉ. निधि सिंह): नव युग मंगल किरणों का सर्वत्र व्याप्त उजियारा.

  • पर्यावरण गीत

    पर्यावरण गीत

    (विनीता गुप्ता): हे! तरुवर, हे! महा विटप तुम स्वीकारो मेरा वंदन.

  • जय श्री राम

    जय श्री राम

    (विनीता गुप्ता): भारत की माटी का हर कण राम नाम अब बोल रहा.

  • सरप्राइज़

    सरप्राइज़

    (रवि ऋषि): नन्हा बंटी अब दो साल का होने को आया था. ऋतिक और रानी दोनों सुबह जल्दी काम पर निकलते थे सो नन्हे बंटी को घर…

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