Category: Poetry
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ग़ज़ल
(अजय अज्ञात): कल भी ये अधूरी थी, आज भी अधूरी है. इश्क़ के बिना यारो, ज़िन्दगी अधूरी है. जगमगा रहा है घर, जगमगाते बलबों से ज़ेहन में…
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चार ग़ज़लें
(अना क़ासमी): आज पहली बार बेटी ने पकाई रोटियां. टेढ़ी-मेढ़ी मोटी पतलीं कच्ची पक्की रोटियां.
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चार ग़ज़लें
(अतुल अजनबी): हवा सी, आग सी, पानी सी, धूप सी गुज़री. हर इम्तिहां से यहां अपनी ज़िन्दगी गुज़री.